In Kalimpong's Mahadev Dham, this time also there is silence.

कालिमपोंग का महादेव धाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है भगवान शिव की नगरी के रूप में महादेव धाम ना सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी काफी प्रसिद्ध है महादेव धाम के प्रति लोगों की असीम आस्था है सावन के महीने में हर साल हजारों भक्त हैं बाबा के दरबार में आशीर्वाद लेने आते हैं महादेव धाम पूरी तरह से सरकारी सुरक्षा के दायरे में है इलाके में भगवान शिव के दर्शन होने के बाद इस मंदिर का निर्माण किया गया था ऐसी मान्यता है कि महादेव धाम में आकर जो भी मन से भगवान शिव से जो भी कुछ मांगता है उसे वह अवश्य प्राप्त होता है। सावन के महीने में पिस्ता से पानी लेकर लोग यहां जल चढ़ाने आते हैं मंदिर कमेटी के लोगों ने बताया कि पत्थर पर बाघ की छाल और शिवलिंग खुद ब खुद पत्थर पर बना हुआ था। मंदिर कमेटी के लोगों ने आगे बताया कि बहुत साल पहले गांव की एक महिला जब खेत में काम कर रही थी तो उन्हें भगवान शिव का दर्शन हुआ भगवान शिव का दर्शन होते ही महिला बेहोश हो गई जब उसको होश आया तो उसने गांव के लोगों को सारी कहानी बताएं और उसके बाद 1984 में उसी जगह पर भगवान शिव का मंदिर बनाया गया। मंदिर कमेटी के लोगों के मुताबिक भगवान शिव इलाके के कई लोगों के सपनों में आए हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक महादेव के इस मंदिर में रात के वक्त डमरू की आवाज भी सुनाई पड़ती है। मंदिर कमेटी के लोगों ने मांग किया है कि सरकार को महादेव धाम के प्रति ध्यान देने की जरूरत है और इस जगह को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रचार प्रसार की भी जरूरत है। अगर सरकार आगे आती है तो इस वंचित इलाके के गरीब लोगों को काफी फायदा पहुंचेगा। सावन के महीने में इस बार भी करोना महामारी के कारण भक्तों की संख्या बहुत कम देखने को मिल रही है।

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