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सुन के लोगो के ताने मां ने बनाया बेटी को शेरनी

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सुन के लोगो के ताने मां ने बनाया बेटी को शेरनी

सुन के लोगो के ताने मां ने बनाया बेटी को शेरनी। तमाम परेशानियों के बावजूद नही मानी हार। 18 साल की उम्र में नेहा बनी भारतीय टीम की सदस्य । छोटा सा घर, घर में बीमार मां और हाथ में भारत के लिए जीते बड़े-बड़े मेडल। कहानी को कम और सरल शब्दों में कहें तो यही है महिला हॉकी टीम की मिड फील्डर नेहा गोयल की कहानी का सार। लेकिन नेहा गोयल की कहानी का दायरा शब्दों के बांध तोड़ देता है और हमें मजबूर करता है कि हम इस खिलाड़ी की ज़िंदगी में झांकें और जानें आख़िर वो कौन हैं। तो हम अपने दर्शकों को बता दे की ,नेहा इस साल जुलाई के महीने में शुरू होने जा रहे 2020 टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम के साथ खेलती नज़र आएंगीं। 1 नवंबर साल 2019 को भारतीय महिला हॉकी टीम ने अमेरीका की टीम F.I.H क्वालीफ़ायर में 6-5 से हरा कर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। नेहा बताती हैं,की उनकी तीन बहनें हैं और वो परिवार में सबसे छोटी है। पिता शराब बहुत पीते थे जिसके चलते घर का माहौल अच्छा नहीं रहता था. पिता की तरफ़ से आर्थिक मदद भी ज़्यादा नहीं मिल पाती थी। इस बीच उनकी एक दोस्त ने बताया कि हॉकी खेलने से उन्हे अच्छे जूते, कपड़े पहनने को मिलेंगे।” जी हां,और नेहा ने उस वक़्त अच्छे कपड़े-जूतों के लिए हॉकी खेलना शुरू किया। फिर एक जिला स्तर का मुकाबला जीतने के बाद उन्हें दो हज़ार रुपए का ईनाम मिला जिसके बाद उन्हें लगा कि शायद इस खेल के जरिए वह अपने घर की आर्थिक हालत सुधार सकती हैं। पिता इस खेल में नेहा को बढ़ावा नहीं देना चाहते थे, पर मां ने अपनी बेटी का पूरा साथ दिया। वह बताती हैं कि उनके घर के आसपास रहने वाले लोगों ने मां को बहुत बार हिदायत दी कि ‘बेटी को यूं बाहर मत निकालों, कहीं कोई उठाकर कभी ले जाए तो? ’मां ने समाज के तानों से ऊपर अपनी बेटी और उसके खेलने के जज्बे को रखा। इतना ही नहीं बल्कि नेहा के पिता की मौत के बाद उनकी मां ने किया फ़ैक्ट्रियों में काम। हम आपको बता दे,नेहा के पिता की मौत के बाद नेहा की मां ने फैक्ट्रियों में काम करना शुरू किया। कभी जूतों की फैक्ट्री में काम करतीं, तो कभी साइकिल के कारखाने में एक घंटे का 4 रुपए मेहनताना कमातीं। नेहा ने कहा कि उन दिनों वो प्रैक्टिस के बाद अपनी दोनों बहनों के साथ अपनी मां की घर और फैक्ट्री के काम में हाथ बटातीं थी। नेहा ने बताया कि उनकी कोच प्रीतम रानी सिवाच ने उनकी आर्थिक मदद की। उनकी कोच नेहा के जूते खराब होने पर उन्हें पैसे देतीं ताकि वह नए जूते खरीद सके। नेहा ने खेल के साथ-साथ अपने घर को जिस तरह से संभाला, उसकी उम्मीद इतनी कम उम्र की लड़की से करना मुश्किल ही होगा। नेहा कहती हैं कि अपनी दोनों बहनों की शादी भी उन्होंने ही कराई थी। घर के हालातों से समझौता करने की बजाए नेहा गोयल ने हर मुश्किल का सामना डटकर किया। अपने खेल में भी उतनी ही मेहनत की। और अब नेहा की नजर है ओलंपिक पदक पर। रेलवे में सीनियर नेशनल की प्रतियोगिताओं में नेहा भाग लेतीं रहीं और हर बार उनकी टीम गोल्ड मेडल जीतती। नेहा के मुताबिक उनकी हॉकी के मैदान में सबसे बड़ी उपलब्धि रही साल 2018 के एशियाई खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए फाइनल के मुकाबले में गोल दागना जिसने भारत को एशियाई खेल में रजत पदक जिताया। हालांकि नेहा के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करने का मौका टोक्यो में उनका इंतज़ार कर रहा है जहां भारतीय महिला हॉकी टीम ओलंपिक पदक के लिए लड़ाई लड़ेगीं। हम पूरे भारत वायिसियों को नेहा गोयल पे गर्व करना चाहिए आखिर इतनी कड़ी मेहनत ने उन्हें इतना आगे बढ़ाया है।

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